टीपू एक मजहबी मुसलमान, ना कि स्वतंत्रता सेनानी, कर्नाटक सरकार बदलेगी इतिहास

War Over Tipu BJP Karnataka

बंगलुरु : कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा एक ऐसा फैसला लेने जा रहे हैं , जिस पर बवाल मचना तय है। बीजेपी जो कि राष्ट्ररवादी विचार धारा का समर्थन करती रही है, के नेतृत्व में बनी कर्नाटक सरकार के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार स्कूलों की किताबों से टीपू सुल्तान से जुड़े पाठ को हटाने के बारे में सोच रही है। इतिहास की किताबों में टीपू सुल्तान से जुड़े पाठ पर येदियुरप्पा ने कहा कि वह नहीं मानते कि टीपू सुल्तान स्वतंत्रता सेनानी थे। बीजेपी यह मानती आयी है कि टीपू ना एक स्वतंत्रता सेनानी था ना कोई महान शासक। उसके बारे में इतिहासकारों ने बढ़ा चढ़ा कर लिखा है।

 

हम आपको यह जानकारी दे दें कि हाल ही में कर्नाटक के एक बीजेपी विधायक अपाचु राजन ने कहा था कि टीपू सुल्तान से जुड़े पाठ में ‘गलत जानकारी’ दी गई है। इसी के साथ उन्होंने इस पाठ को हटाने की मांग की थी। इस बारे में बुधवार को जब सीएम येदियुरप्पा से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘हम टीपू से जुड़ी चीजों को किताब से हटाने के बारे में विचार रहे हैं।’

 

मुख्यमंत्री  येदियुरप्पा ने अपनी बात को विस्तार देते हुए  कहा कि, ‘मुझे लगता है कि टीपू सुल्तान एक महान स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे। हम इस मुद्दे को गौर से देखेंगे और हम इसका परीक्षण करेंगे।’ इस मामले पर कर्नाटक  कांग्रेस की भी प्रतिक्रिया आ गई है। काग्रेस का कहना है कि बीजेपी नेतृत्व वाली सरकार  इतिहास से छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रही है।

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बीजेपी के ऐसे फैसले के लागू होने में भी हो सकता है , जलदबादी की जाए। राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार ने सोमवार को ही अधिकारियों से कहा है कि वे तीन दिन में विधायक अपाचु राजन की मांग के बारे में रिपोर्ट तैयार करके दें। कर्नाटक टेक्स्टबुक सोसायटी के प्रबंध निदेशक को जारी एक नोट में शिक्षा मंत्री ने कहा है कि वह इतिहास की किताब की ड्राफ्टिंग कमिटी की एक मीटिंग बुलाएं और उसमें विधायक अपाचु राजन को भी बुलाकर इस पाठ की जरूरत पर चर्चा करें। गौरतलब है कि अपाचु राजन ने पिछले हफ्ते ही मंत्री को पत्र लिखकर टीपू सुल्तान से जुड़े पाठ को हटाने की मांग की थी।

 

अपाचु राजन के अनुसार  टीपू सुल्तान के बारे में यह लिखित तथ्य है कि टीपू ने ने हजारों ईसाइयों और अन्य समुदायों को जबरन मुसलमान बनाया था। कोई भी जन प्रिय शासक ऐसा मजहबी नहीं हो सकता। और वह (टीपू सुल्तान) स्वतंत्रता सेनानी नहीं था। इस मामले पर विधानसभा में विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने कहा कि बीजेपी कट्टर है। कर्नाटक कांग्रेस के प्रमुख दिनेश गुंडू राव ने सरकार के इस कदम का विरोध किया  है और   कहा है, ‘क्या येदियुरप्पा कोई एक्सपर्ट हैं, जो टीपू के बारे में चैप्टर हटाएंगे?’

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यह कोई नई बात नहीं है। बीजेपी के निशाने पर पहले भी टीपू सुल्तान का नाम रहा है । इसी साल जुलाई में सत्ता पर काबिज होते ही बीजेपी ने टीपू सुल्तान के जन्मदिवस समारोह को रद्द कर दिया था। बीजेपी 2015 से ही इस आयोजन का विरोध कर रही थी। बीजेपी और कई दक्षिणपंथी संगठन टीपू सुल्तान को धार्मिक कट्टर बताकर इस आयोजन का विरोध करते रहे थे। कर्नाटक में अब धीरे धीरे लोगों का एक समूह लिखित दस्तावेजों के आधार पर टीपू के इतिहास लेखन और उसके व्यक्तित्व के महिमांडन पर सवाल उठाने लगा है। ऐसे में आज अधिक जरुरत इस बात की है निष्पक्ष रुप से टीपू के व्यक्तित्व की पुनर्समीक्षा की जाए।